सेंसर बोर्ड की हरी झंडी का इंतजार कर रहा ‘विधना नाच नचाबे’

पटना:- बिहार में हर जिला का अलग-अलग क्षेत्रीय भाषा और बोली है इन सबका अपना अलग ही महत्व रहा है। ये भाषाएं अपने जगहों की पहचान भी बनती रही है इनपर कई फिल्म, नाटक भी बनते रहे है।

 

मगध का सांस्कृतिक महत्व तो रहा है ही है यहाँ की भाषाएं भी प्राचीन काल से प्रसिद्ध रही है। वर्षो बाद बड़े पर्दे पर मगही भाषा में फिल्म लेकर आ रहे है फिल्म निर्माता निर्देशक,पटकथा,संवाद और गीत के रचयिता प्रभात वर्मा जिन्हें फिल्म रिलीज के लिए सेंसर बोर्ड की हरी झंडी का इंतजार है। उनका कहना है यह सामाजिक फिल्म है जिसे बनाने में बहुत तरह की आर्थिक और सामाजिक परेशानियों का सामना करना पड़ा फिर मैंने हार नहीं माना। मैं बिहार की संस्कृति और यहां की सभ्यता को बड़े पर्दे पर दिखाना चाहता हूं ताकि बिहार को लेकर जो लोगों के मन में गलत छवि है वो दूर हो जाये। यह सारी कोशिश मैंने अपने जीवन भर की जमापूंजी से किया है इस कोशिश को अंजाम तक पहुँचाने का कार्य करता रहूंगा।

इस फिल्म के लिए प्रभात वर्मा ने सात गाने भी लिखे है। जिसमें शादी गीत, बिहार का चर्चित पर्व छठ पर्व के गीत,चुनाव गाने औऱ प्रेम के गीत शामिल है|

अब देखना यह होगा कि इस फिल्म को सेंसर बोर्ड की तरफ से हरी झंडी कब मिलती है?

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