खून के रिश्ते से भी मजबूत है यह दिल का रिश्ता

रक्षाबंधन भाई बहन के विश्वास का त्योहार है ।जो एक-दूसरे को भावनात्मक रूप में जोड़े रखता है ।आज के दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर रेशम की डोर बांध कर उनकी लंबी उम्र की दुआ मांगती है ।इसके साथ भाई-बहन एक दूसरे के लिए गिफ्ट की भी खरीदारी करते हैं। यह त्यौहार सभी भाई-बहनों के लिए खास माना जाता है।

आज के डिजिटल युग में जहां खुद के खून के रिश्ते के लिए लोगों के पास टाइम नहीं है तो वहीं समाज में कुछ ऐसे भी लोग हैं जो अनजान लोगों के साथ जुड़कर भाई बहन जैसा रिश्ता सालों से निभाते आ रहे हैं ये रिश्ते गहरे हो चुके हैं खून से भी ज्यादा मजबूत। मैं बात करूंगी ऐसे भाई बहन की जिन्होंने जाति मजहब सब पीछे छोड़ कर एक नया रिश्ता कायम किया दिल का रिश्ता। सगे भाई बहन से बढ़कर है इनका रिश्ता जिसे पढ़कर आप लोगों को एहसास जरूर होगा कि जरूरी नहीं रिश्ते खून के ही हो तभी निभाए जाएंगे कुछ रिश्तो का एहसास ही अलग होता है ।

1.आकांक्षा और ज़ाहिर हसन- आकांक्षा और जाहिर पटना के दानापुर में रहते हैं इनकी कहानी अनूठी है जहां एक और मजहब के नाम पर लोग लड़ाइयां कर रहे हैं तो दूसरी ओर इन दोनों ने मजहब को पीछे छोड़,बचपन से आकांक्षा जाहिर को राखी बांधती आ रही हैं । आकांक्षा बताती हैं मैं अपने भाई से अपनी सारी परेशानियां तकलीफे शेयर करती हूं । हमदोनों ने कभी मजहब को अपने रिश्ते के बीच नहीं आने दिया। हम लोग सभी त्यौहार को एक साथ मिलकर मनाते हैं ।सच में इनकी कहानी इन धर्म के ठेकेदारों को आईना दिखाती हुई है जो मजहब के नाम पर रायता फैलाते हैं।

2.विष्णु सिंह और मोनी यादव- जहाँ एक और जाति व्यवस्था को लेकर इतना तनाव है,उसी दौड़ में विष्णु और मोनी का भाई बहन होना,समाज को करारा जवाब है।
रिश्तें कभी भी समय,जाति या किसी अन्य चीज का मोहताज़ नहीं होता।
एक आत्मविश्वास से भरी, स्वयं के पैर पर खड़ी और एक नौजवान इंजीनियर भाई,जो हर हार जीत में उसके साथ खड़ा है।
उसकी ज़रा भी क़ामयाबी को स्याही से कोरे पन्ने पर कविता के रूप में अंकित कर देता है।विष्णु बताते है
मोनी का दिल बहुत साफ़ है,मेरे जीवन में जो कमी थी वो पूरा कर दिया । एक अच्छे हेयर स्टाइलिस्ट के साथ साथ एक बहुत अच्छी ह्रदय वाली मेरी बहन है।
एक प्रेरणा,एक मिसाल की तरह,जो अपने पूरे परिवार का भरण पोषण करती है। कोई भी समस्या आने पर मैं हर वक़्त उसके साथ होता हूँ।

3.सविता अंबिका आनंद– इन दोनों भाई बहन की कहानी बिल्कुल अनोखी है करीब 40-50 साल से यह दोनों एक दूसरे को भाई बहन मानते हैं ।अंबिका आनंद को बहन के ना होने का अफसोस होता लेकिन जब सविता इनकी जिंदगी में आयी तो बहन की कमी दूर हो गई ।

4.अजीत मेहता रीति- इन दोनों भाई बहन के रिश्ते में नोकझोंक है तो टकरार भी है सगे भाई बहन से अजीज रिश्ता है इन दोनों का। रीति बताती है जब से हम मिले हैं एक भी साल ऐसा नहीं हुआ कि जब मैंने भैया को राखी नहीं बांधी हो।हर साल धूमधाम से भैया के साथ राखी सेलिब्रेट करती हूँ।

सच में आज के इस डिजिटल युग में जहां लोगों के पास रिश्ते निभाने का टाइम नहीं है ।उस दौर में आकांक्षा जाहिर, विष्णु मोनी, सविता अंबिका आनंद, अजीत रीति जैसे भाई बहन का रिश्ता समाज में मिसाल है उन ।लोगों के लिए जो खून के रिश्ते को अपना मानते हैं क्योंकि कुछ रिश्ते दिल के भी होते हैं जो खून के रिश्ते से बड़े होते हैं।

 

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