बच्चों की नेट हिस्ट्री पर नजर रखें और उन्हें खतरनाक भविष्य की झलक दिखाकर डराइये

पटना:- देश में मासूम बच्चियों के साथ बढ़ते बलात्कार ने पूरे देश को हिला कर रख दिया है मध्यप्रदेश के मंदसौर के बाद अब सतना में एक 4 साल की बच्ची के साथ रेप का मामला सामने आया है बच्ची की हालत गंभीर बनी हुई है उसे सतना से जबलपुर रेफर किया गया है। इस दर्दनाक घटना से देश का हर इंसान दुखी है लेकिन बड़ा सवाल यह उठता है कि आय दिन होने वाली ऐसी घटनाओं का जिम्मेदार कौन है बढ़ती रेप की समस्याओं को लेकर पटना के जाने माने चिकित्सक राणा संजय ने लेख लिखा है-

Rana sanjay, doctor

ऐसा नहीं है कि बलात्कार कोई आज एकाएक होने लगे हैं, पहले नहीं होते थे या बलात्कार के बाद पीड़ित की हत्या नहीं होती थी। यह अपराध पहले भी होते थे अब ज्यादा होते दिख रहे है उसकी कोई एकाध वजह नहीं.. कई वजहें हैं। एक मुख्य वजह तो अंधाधुँध बढ़ती आबादी ही है, ज्यादा आबादी मतलब ज्यादा अपराध.. जिसकी बड़ी वजह न सिर्फ लचर कानून व्यवस्था है, बल्कि एक समाज के रूप में जबर्दस्त नैतिक पतन भी है।

सबसे चिंताजनक बात जो है वो बलात्कार की बदलती प्रवृत्ति है.पहले जहां इसकी शिकार आम तौर पर महिलायें और सयानी हो चुकी लड़कियाँ होती थीं, वहीं अब कोई वर्जना नहीं दिखती.. अस्सी नब्बे साल की वृद्धा से लेकर छोटी-छोटी लड़कियाँ तक इसकी शिकार हो रही हैं और बलात्कार का तरीका भी इतना वीभत्स हो रहा है कि जिसे सुन पढ़ कर ही रौंगटे खड़े हो जाते हैं. आखिर इस हैवानियत की वजह क्या है।

एक खास चीज पर ध्यान दीजिये. मंदसौर टाईप के ज्यादातर केस में आरोपी कम के उम्र होते हैं और अगर इनकी हिस्ट्री चेक की जाये तो लगभग सभी पोर्न के शौकीन मिलेंगे। पहले जो दुकानों से पोर्न क्लिप्स डलवाने की बाध्यता थी भी, वह सस्ती इंटेटनेट ने खत्म कर दी। पहले छोटी उम्र के अपरिपक्व लड़के थोड़ा लिहाज भी करते थे. अब उसकी जरूरत नहीं रही। वे सस्ते नेट का फायदा उठा कर कहीं भी देख सकते हैं।

बड़े देखते हैं तो अपने अनुभव और इमेज की फिक्र के चलते वे फिर खुद पर एक हद तक नियंत्रण कर लेते हैं लेकिन अपरिपक्व बुद्धि प्रैक्टिकल की चाह में हर विकल्प टटोलने लग जाती है, जिसकी परिणति इस तरह की वीभत्स घटनाओं के रूप में भी होती है। अभी हमें इस तरह की घटनायें उद्वेलित कर रही हैं लेकिन एक संभावना के मुताबिक जब इनकी भरमार हो जायेगी तब यह भी हमारे लिये बाकी अपराधों की तरह सामान्य अपराध हो जायेंगे।

इसका उपाय फीमेल जेंडर की ‘सुरक्षा’ नहीं है. उस तरह आप हादसे की शिकार होने वाली लड़कियों बच्चियों को नहीं बचा सकते, क्योंकि किसी को भी चौबीस घंटे सुरक्षा नहीं दी जा सकतीं। इंसानी जरूरतें उन्हें किसी न किसी मौके पर सुरक्षा घेरे से बाहर ले ही जाती हैं, जहां कोई हादसा उनका इंतजार कर रहा होता है।

इसके तीन उपाय हो सकते हैं.. पहली चीज, यह महसूस कीजिये कि बलात्कारी कहीं और से नहीं आते, हमारे बीच के ही होते हैं। अपने घर के लड़कों पर नजर रखिये, उन्हें समझाइये, एक खतरनाक भविष्य की झलक दिखा कर डराइये, उनकी नेट हिस्ट्री पर नजर डालिये और कंट्रोल करने की कोशिश कीजिये।

दूसरे हमारी युवा पीढ़ी सस्ते नेट का उपयोग करने लायक परिपक्व नहीं.. इसे दुरुपयोग से बचाने के लिये सरकार को चाहिये नेट उसी तरह महंगा करे, जैसे पहले चल रहा था। जरूरी काम पहले भी हो ही जाते थे.. यूँ बेधड़क पोर्न पर डेटा खर्च करने की हिम्मत तब कितने लोगों में थी?

तीसरे इस तरह के केसेज में तीन महीने के अंदर फैसला आना चाहिये और सजा किसी भी सूरत में मौत से कम न हो. जब तक लोगों में लचर कानून के सहारे बच जाने की उम्मीद बनी रहेगी, किसी में भी सूरत में उनमें अंजाम का डर नहीं पैदा होगा।

मंदसौर टाईप केस को रेयर ऑफ रेयरेस्ट में रखते हुए मौत की सजा सार्वजनिक रूप से देनी चाहिये. ठीक इस्लामिक मुल्कों की तरह।

किसी भी तरह के अपराध की न वजह एक हो सकती है, न उनसे बचने के उपाय. हर रीजन को समझना और उसके हिसाब से उपाय करना जरूरी हैं तभी इस बढ़ती दर्दनाक घटनाओ का हल ढूंढा जा सकता है।
                                                                                                 राणा  संजय, चिकित्सक

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