हिन्दी के विकास से किसी भी अन्य भारतीय भाषाओं का अहित नहीं 

हिन्दी के विकास से किसी भी अन्य भारतीय भाषाओं का अहित नहीं

नया भाषा भारती संवादने एक बड़े सेतु का कार्य किया है

पत्रिका के १९ वे वर्ष के चौथे अंक का हुआ लोकार्पण

पटना – हिंदी भाषा और साहित्य के उन्नयन से किसी भी अन्य भारतीय भाषाओं का अहित नहीं हो सकता। बल्कि इससे भारतीय भाषाओं के बीच आत्मीय संबंधों का विकास ही होगा। संपूर्ण भारत के लोग भाषाबंधन के विकारों से मुक्त होकर एक दूसरे के निकट होंगे और एक सुदृढ़ राष्ट्रीय विचार सुनिश्चित करने में सफल होगे। हिन्दी देश की रागात्मक एकता को सुनिश्चित करने में भी बड़ी सहायिका सिद्ध हो सकती है। 

यह विचार आज यहाँबिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन और भारतीय भाषासाहित्य समागम के संयुक्त तत्वावधान मेंसाहित्यिक त्रैमासिक नया भाषा भारती संवाद‘ के १९ वें वर्ष के चौथे अंक के लोकार्पण के अवसर परमें आयोजित समारोह का उद्घाटन करते हुएसम्मेलन के अध्यक्ष डा0 अनिल सुलभ ने वयक्त किए। ड़ा सुलभ ने कहा कि यह पत्रिका हिन्दी की उन्नति में अत्यंत मूल्यवान योगदान दे रही है। देश की हिन्दीपट्टीमें ही नहींअपितु सम्पूर्ण भारत वर्ष में इसकी उपयोगिता और स्वीकृति सिद्ध हुई है। इसमें देश भर के साहित्यिकसमाचार ही नहींरचनात्मकसाहित्य,शोध और समीक्षा के लिए भी समुचित स्थान दिए जा रहे हैं।

पत्रिका का लोकार्पण करते हुएवरिष्ठ लेखक जियालाल आर्य ने कहा कि,यह पत्रिका संपूर्ण देश की साहित्यिक गतिविधियों से पाठकों को अवगत कराती है। यह देश की सीमाओं को लाँघ कर विदेशों में रहनेवाले हिन्दीसेवियों और हिन्दीप्रेमियों के बीच पहुँच रही हैजो प्रसन्नता की बात है। इस मूल्यवान पत्रिका को सुधी लेखकोंपाठकों और समीक्षकों का सहयोग प्राप्त होना चाहिएजिससे इसे और भी परिष्कृत करना संभव हो सके।

पत्रिका के प्रधानसम्पादक नृपेंद्र नाथ गुप्त ने कहा कि इस पत्रिका के दीर्घजीवी और नियमित रहने का बड़ा कारण सम्पूर्ण भारतवर्ष के विद्वान साहित्यकारों क़ा सहयोग और आशीर्वाद है। पूरे देश में इसकी पहुँच के पीछे भी विद्वानों का आशीर्वाद है। 

समारोह के विशिष्ट अतिथि श्यामजी सहायवरिष्ठ लेखक राजीव कुमार सिंह परिमलेन्दु‘ , सम्मेलन के उपाध्यक्ष डा0 शंकर प्रसादडा0 कल्याणी कुसुम सिंहडा0 बासुकी नाथ झाडा मेहता नागेन्द्र सिंहडा0 कृष्ण कांत शर्माबच्चा ठाकुररमेश कँवल,अमियनाथ चटर्जी,आरपी घायलडा आर प्रवेशराज कुमार प्रेमीडा0 विनय कुमार विष्णुपुरीडा0 नागेश्वर प्रसाद यादव,विभारानी श्रीवास्तव,आचार्य आनंद किशोर शास्त्रीसंजू शरणसिंधु कुमारी,डा0 जनार्दन प्रसाद सिंहआचार्य पाँचु रामडा0 पूनम देवी,विष्णु प्रसाद,प्रभात धवनकृष्ण रंजन सिंहसाइस्ता अंजुमराज किशोर झालता प्रासर,राम किशोर सिंह विरागी,रवींद्र सिंह,श्यामनंदन सिन्हा,नीरव समदर्शीडा0 रब्बान अलीनेहाल कुमार सिंह तथा चंद्रशेखर आज़ाद ने भी अपने विचार व्यक्त किए। अतिथियों का स्वागत पत्रिका के सहसंपादक बाँके बिहारी साव ने तथा धन्यवादज्ञापन पत्रिका के प्रबंधसम्पादक प्रो सूखित वर्मा ने किया। मंच का संचालन योगेन्द्र प्रसाद मिश्र द्वारा किया गया।

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