साक्षात बालाजी का रूप कहा जाता है ये बंदर, 8 सालों से मंदिर की कर रहा है सेवा, देता है लोगों को आशीवार्द

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अक्सर हम यह देखते आएं हैं कि किसी पुजारी या व्यक्ति द्वारा ही एक मंदिर की सेवा और देखभाल की जाती है. लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि पिछले आठ वर्षों से यह काम एक बंदर भी कर रहा है. वह अजमेर के बजरंगगढ़ में स्थिति एक प्राचीन हनुमान मंदिर में अपनी सेवा दे रहा है. यहां भगवान हनुमान जी की मूर्ति का मुंह खुला हुआ है. ऐसी मान्यता है कि लोगों द्वारा चढ़ाया गया प्रसाद सीधे हनुमानजी के मुंह से होते हुए उनके पेट तक पहुँच जाता है.

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इस मंदिर में रहने वाले बंदर को लोग ‘रामू’ कहकर पुकारते हैं. वह हमेशा मंदिर में ही रहता है. उसका खाना-पीना भी मंदिर में ही होता है. लोग इसे साक्षात बालाजी का रूप समझते हैं.

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रामू मंदिर में आने वाले भक्तों को आशीर्वाद भी देता है. जब मंदिर में हनुमान चालीसा के पाठ होता है तो रामू भी अन्य भक्तों के तरह ही उसे ध्यानपूर्वक सुनता है. इसके बाद जब आरती गायी जाती है वो घंटी और झाल भी बजाता है.

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इस मंदिर की चौकीदारी करने वाले ओंकार सिंह यह बताते हैं कि रामू मंदिर में भजन के दौरान जमकर नाचता है. जबकि वह मंदिर में दर्शन करने आये भक्तों के सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद भी देता है.

ओंकार के अनुसार रामू किसी मदारी के यहां से भागकर इस मंदिर में आया था. उसे यहां आठ वर्ष से अधिक हो गए हैं. ओंकार ने बताया जब रामू इस मंदिर में आया था तो काफी बीमार था. लेकिन ओंकार ने उसकी सेवा और देखभाल कर उसे जल्दी स्वस्थ बना दिया.

इस वजह से रामू और ओंकार के बीच गहरी दोस्ती हो गई. कहा जाता है कि दोनों के बीच इतना गहरा रिश्ता है कि वें एक दूसरे की मन की बातों को भी पढ़ लेते हैं. साथ ही आसपास के लोग भी रामू से काफी प्यार करते हैं.

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