कविता छोटुआ का गणतंत्र

गणतंत्र में ठंढक
सांकेतिक तस्वीर

 

छोटुआ का गणतंत्र

गणतंत्र में ठंढक ने

जलेबी फीकी कर दी

दो दिन की बारिश ने

चाय की याद ताजा की

 

भींगते गणतंत्र में

छोटुआ का टिन का शेड

भींगते हुए रो रहा था

छोटुआ के नहीं बिके झंडों की

दु:ख में, जोर-शोर सर

साथ निभा रहा था

 

उसका कुत्ता भी

एकबार छोटुआ को

फिर, तलते जलेबी को

दूर से देख रहा था

बारिश को भौंकते हुए

डाँट रहा था ।

 

कवयित्री-तपती चटर्जी ।

पटना,बिहार ।

 

 

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